महाभारत 1.1.89
विमानप्रतिमां चापि मयेन सुकृतां सभाम्पाण्डवानामुपहृतां स दृष्ट्वा पर्यतप्यत
vimānapratimāṃ cāpi mayena sukṛtāṃ sabhāmpāṇḍavānāmupahṛtāṃ sa dṛṣṭvā paryatapyata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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