महाभारत 1.1.94
निरस्य विदुरं द्रोणं भीष्मं शारद्वतं कृपम्विग्रहे तुमुले तस्मिन्नहन्क्षत्रं परस्परम्
nirasya viduraṃ droṇaṃ bhīṣmaṃ śāradvataṃ kṛpamvigrahe tumule tasminnahankṣatraṃ parasparam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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