महाभारत 1.10.3
डुण्डुभ उवाच · ḍuṇḍubha uvāca
अन्ये ते भुजगा विप्र ये दशन्तीह मानवान्डुण्डुभानहिगन्धेन न त्वं हिंसितुमर्हसि
anye te bhujagā vipra ye daśantīha mānavānḍuṇḍubhānahigandhena na tvaṃ hiṃsitumarhasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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