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महाभारत 1.10.7
डुण्डुभ उवाच · ḍuṇḍubha uvāca
अहं पुरा रुरो नाम्ना ऋषिरासं सहस्रपात्सोऽहं शापेन विप्रस्य भुजगत्वमुपागतः
ahaṃ purā ruro nāmnā ṛṣirāsaṃ sahasrapātso'haṃ śāpena viprasya bhujagatvamupāgataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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