महाभारत 1.100.12
ज्ञातिवंशस्य गोप्तारं पितॄणां वंशवर्धनम्द्वितीयं कुरुवंशस्य राजानं दातुमर्हसि
jñātivaṃśasya goptāraṃ pitṝṇāṃ vaṃśavardhanamdvitīyaṃ kuruvaṃśasya rājānaṃ dātumarhasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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