महाभारत 1.100.2
कौसल्ये देवरस्तेऽस्ति सोऽद्य त्वानुप्रवेक्ष्यतिअप्रमत्ता प्रतीक्षैनं निशीथे आगमिष्यति
kausalye devaraste'sti so'dya tvānupravekṣyatiapramattā pratīkṣainaṃ niśīthe āgamiṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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