महाभारत 1.104.8तथोक्ता सा तु विप्रेण तेन कौतूहलात्तदाकन्या सती देवमर्कमाजुहाव यशस्विनीtathoktā sā tu vipreṇa tena kautūhalāttadākanyā satī devamarkamājuhāva yaśasvinīइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें