महाभारत 1.11.5तस्याहं तपसो वीर्यं जानमानस्तपोधनभृशमुद्विग्नहृदयस्तमवोचं वनौकसम्tasyāhaṃ tapaso vīryaṃ jānamānastapodhanabhṛśamudvignahṛdayastamavocaṃ vanaukasamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें