महाभारत 1.111.3
केषांचिदभवद्भ्राता केषांचिदभवत्सखाऋषयस्त्वपरे चैनं पुत्रवत्पर्यपालयन्
keṣāṃcidabhavadbhrātā keṣāṃcidabhavatsakhāṛṣayastvapare cainaṃ putravatparyapālayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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