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महाभारत 1.112.20
पतिं विना मृतं श्रेयो नार्याः क्षत्रियपुंगवत्वद्गतिं गन्तुमिच्छामि प्रसीदस्व नयस्व माम्
patiṃ vinā mṛtaṃ śreyo nāryāḥ kṣatriyapuṃgavatvadgatiṃ gantumicchāmi prasīdasva nayasva mām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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