महाभारत 1.112.23
छायेवानपगा राजन्सततं वशवर्तिनीभविष्यामि नरव्याघ्र नित्यं प्रियहिते रता
chāyevānapagā rājansatataṃ vaśavartinībhaviṣyāmi naravyāghra nityaṃ priyahite ratā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें