महाभारत 1.113.10
मर्यादेयं कृता तेन मानुषेष्विति नः श्रुतम्कोपात्कमलपत्राक्षि यदर्थं तन्निबोध मे
maryādeyaṃ kṛtā tena mānuṣeṣviti naḥ śrutamkopātkamalapatrākṣi yadarthaṃ tannibodha me
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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