महाभारत 1.113.18
भार्यां तथा व्युच्चरतः कौमारीं ब्रह्मचारिणीम्पतिव्रतामेतदेव भविता पातकं भुवि
bhāryāṃ tathā vyuccarataḥ kaumārīṃ brahmacāriṇīmpativratāmetadeva bhavitā pātakaṃ bhuvi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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