महाभारत 1.113.19
पत्या नियुक्ता या चैव पत्न्यपत्यार्थमेव चन करिष्यति तस्याश्च भविष्यत्येतदेव हि
patyā niyuktā yā caiva patnyapatyārthameva cana kariṣyati tasyāśca bhaviṣyatyetadeva hi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें