महाभारत 1.113.23
अस्माकमपि ते जन्म विदितं कमलेक्षणेकृष्णद्वैपायनाद्भीरु कुरूणां वंशवृद्धये
asmākamapi te janma viditaṃ kamalekṣaṇekṛṣṇadvaipāyanādbhīru kurūṇāṃ vaṃśavṛddhaye
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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