महाभारत 1.113.32
पितृवेश्मन्यहं बाला नियुक्तातिथिपूजनेउग्रं पर्यचरं तत्र ब्राह्मणं संशितव्रतम्
pitṛveśmanyahaṃ bālā niyuktātithipūjaneugraṃ paryacaraṃ tatra brāhmaṇaṃ saṃśitavratam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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