महाभारत 1.113.34
स मेऽभिचारसंयुक्तमाचष्ट भगवान्वरम्मन्त्रग्रामं च मे प्रादादब्रवीच्चैव मामिदम्
sa me'bhicārasaṃyuktamācaṣṭa bhagavānvarammantragrāmaṃ ca me prādādabravīccaiva māmidam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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