महाभारत 1.115.16
ततो माद्री विचार्यैव जगाम मनसाश्विनौतावागम्य सुतौ तस्यां जनयामासतुर्यमौ
tato mādrī vicāryaiva jagāma manasāśvinautāvāgamya sutau tasyāṃ janayāmāsaturyamau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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