महाभारत 1.115.28
ते च पञ्च शतं चैव कुरुवंशविवर्धनाःसर्वे ववृधुरल्पेन कालेनाप्स्विव नीरजाः
te ca pañca śataṃ caiva kuruvaṃśavivardhanāḥsarve vavṛdhuralpena kālenāpsviva nīrajāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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