महाभारत 1.119.39
भोजने भीमसेनस्य पुनः प्राक्षेपयद्विषम्कालकूटं नवं तीक्ष्णं संभृतं लोमहर्षणम्
bhojane bhīmasenasya punaḥ prākṣepayadviṣamkālakūṭaṃ navaṃ tīkṣṇaṃ saṃbhṛtaṃ lomaharṣaṇam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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