महाभारत 1.119.8
गच्छ त्वं त्यागमास्थाय युक्ता वस तपोवनेमा द्रक्ष्यसि कुलस्यास्य घोरं संक्षयमात्मनः
gaccha tvaṃ tyāgamāsthāya yuktā vasa tapovanemā drakṣyasi kulasyāsya ghoraṃ saṃkṣayamātmanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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