महाभारत 1.123.2
द्रोणेन तु तदाहूय रहस्युक्तोऽन्नसाधकःअन्धकारेऽर्जुनायान्नं न देयं ते कथंचन
droṇena tu tadāhūya rahasyukto'nnasādhakaḥandhakāre'rjunāyānnaṃ na deyaṃ te kathaṃcana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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