महाभारत 1.123.64
भासं पश्यसि यद्येनं तथा ब्रूहि पुनर्वचःशिरः पश्यामि भासस्य न गात्रमिति सोऽब्रवीत्
bhāsaṃ paśyasi yadyenaṃ tathā brūhi punarvacaḥśiraḥ paśyāmi bhāsasya na gātramiti so'bravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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