महाभारत 1.13.12
तानब्रवीत्स दृष्ट्वैव जरत्कारुः पितामहान्के भवन्तोऽवलम्बन्ते गर्तेऽस्मिन्वा अधोमुखाः
tānabravītsa dṛṣṭvaiva jaratkāruḥ pitāmahānke bhavanto'valambante garte'sminvā adhomukhāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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