महाभारत 1.13.13
वीरणस्तम्बके लग्नाः सर्वतः परिभक्षितेमूषकेन निगूढेन गर्तेऽस्मिन्नित्यवासिना
vīraṇastambake lagnāḥ sarvataḥ paribhakṣitemūṣakena nigūḍhena garte'sminnityavāsinā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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