महाभारत 1.13.15
अस्माकं संततिस्त्वेको जरत्कारुरिति श्रुतःमन्दभाग्योऽल्पभाग्यानां तप एव समास्थितः
asmākaṃ saṃtatistveko jaratkāruriti śrutaḥmandabhāgyo'lpabhāgyānāṃ tapa eva samāsthitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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