महाभारत 1.13.17
अनाथास्तेन नाथेन यथा दुष्कृतिनस्तथाकस्त्वं बन्धुरिवास्माकमनुशोचसि सत्तम
anāthāstena nāthena yathā duṣkṛtinastathākastvaṃ bandhurivāsmākamanuśocasi sattama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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