महाभारत 1.13.19
जरत्कारुरुवाचमम पूर्वे भवन्तो वै पितरः सपितामहाःब्रूत किं करवाण्यद्य जरत्कारुरहं स्वयम्
jaratkāruruvācamama pūrve bhavanto vai pitaraḥ sapitāmahāḥbrūta kiṃ karavāṇyadya jaratkārurahaṃ svayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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