महाभारत 1.13.1
शौनक उवाच · śaunaka uvāca
किमर्थं राजशार्दूलः स राजा जनमेजयःसर्पसत्रेण सर्पाणां गतोऽन्तं तद्वदस्व मे
kimarthaṃ rājaśārdūlaḥ sa rājā janamejayaḥsarpasatreṇa sarpāṇāṃ gato'ntaṃ tadvadasva me
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें