महाभारत 1.13.22
तद्दारग्रहणे यत्नं संतत्यां च मनः कुरुपुत्रकास्मन्नियोगात्त्वमेतन्नः परमं हितम्
taddāragrahaṇe yatnaṃ saṃtatyāṃ ca manaḥ kuruputrakāsmanniyogāttvametannaḥ paramaṃ hitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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