Loading
महाभारत 1.13.26
दरिद्राय हि मे भार्यां को दास्यति विशेषतःप्रतिग्रहीष्ये भिक्षां तु यदि कश्चित्प्रदास्यति
daridrāya hi me bhāryāṃ ko dāsyati viśeṣataḥpratigrahīṣye bhikṣāṃ tu yadi kaścitpradāsyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें