महाभारत 1.13.27
एवं दारक्रियाहेतोः प्रयतिष्ये पितामहाःअनेन विधिना शश्वन्न करिष्येऽहमन्यथा
evaṃ dārakriyāhetoḥ prayatiṣye pitāmahāḥanena vidhinā śaśvanna kariṣye'hamanyathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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