महाभारत 1.13.28
तत्र चोत्पत्स्यते जन्तुर्भवतां तारणाय वैशाश्वतं स्थानमासाद्य मोदन्तां पितरो मम
tatra cotpatsyate janturbhavatāṃ tāraṇāya vaiśāśvataṃ sthānamāsādya modantāṃ pitaro mama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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