महाभारत 1.13.30
स कदाचिद्वनं गत्वा विप्रः पितृवचः स्मरन्चुक्रोश कन्याभिक्षार्थी तिस्रो वाचः शनैरिव
sa kadācidvanaṃ gatvā vipraḥ pitṛvacaḥ smarancukrośa kanyābhikṣārthī tisro vācaḥ śanairiva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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