महाभारत 1.13.31
तं वासुकिः प्रत्यगृह्णादुद्यम्य भगिनीं तदान स तां प्रतिजग्राह न सनाम्नीति चिन्तयन्
taṃ vāsukiḥ pratyagṛhṇādudyamya bhaginīṃ tadāna sa tāṃ pratijagrāha na sanāmnīti cintayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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