महाभारत 1.13.34
वासुकिरुवाचजरत्कारो जरत्कारुः स्वसेयमनुजा ममत्वदर्थं रक्षिता पूर्वं प्रतीच्छेमां द्विजोत्तम
vāsukiruvācajaratkāro jaratkāruḥ svaseyamanujā mamatvadarthaṃ rakṣitā pūrvaṃ pratīcchemāṃ dvijottama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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