महाभारत 1.13.36
तस्य शापस्य शान्त्यर्थं प्रददौ पन्नगोत्तमःस्वसारमृषये तस्मै सुव्रताय तपस्विने
tasya śāpasya śāntyarthaṃ pradadau pannagottamaḥsvasāramṛṣaye tasmai suvratāya tapasvine
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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