महाभारत 1.13.38तपस्वी च महात्मा च वेदवेदाङ्गपारगःसमः सर्वस्य लोकस्य पितृमातृभयापहःtapasvī ca mahātmā ca vedavedāṅgapāragaḥsamaḥ sarvasya lokasya pitṛmātṛbhayāpahaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें