महाभारत 1.13.40
तस्मिन्प्रवृत्ते सत्रे तु सर्पाणामन्तकाय वैमोचयामास तं शापमास्तीकः सुमहायशाः
tasminpravṛtte satre tu sarpāṇāmantakāya vaimocayāmāsa taṃ śāpamāstīkaḥ sumahāyaśāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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