महाभारत 1.13.6
सूत उवाच · sūta uvāca
इतिहासमिमं वृद्धाः पुराणं परिचक्षतेकृष्णद्वैपायनप्रोक्तं नैमिषारण्यवासिनः
itihāsamimaṃ vṛddhāḥ purāṇaṃ paricakṣatekṛṣṇadvaipāyanaproktaṃ naimiṣāraṇyavāsinaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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