महाभारत 1.130.19
स विश्रब्धः पाण्डुपुत्रान्सह मात्रा विवासयवारणावतमद्यैव नात्र दोषो भविष्यति
sa viśrabdhaḥ pāṇḍuputrānsaha mātrā vivāsayavāraṇāvatamadyaiva nātra doṣo bhaviṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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