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महाभारत 1.130.8
दुर्योधन उवाच · duryodhana uvāca
एवमेतन्मया तात भावितं दोषमात्मनिदृष्ट्वा प्रकृतयः सर्वा अर्थमानेन योजिताः
evametanmayā tāta bhāvitaṃ doṣamātmanidṛṣṭvā prakṛtayaḥ sarvā arthamānena yojitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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