महाभारत 1.133.22
अनाप्तैर्दत्तमादत्ते नरः शस्त्रमलोहजम्श्वाविच्छरणमासाद्य प्रमुच्येत हुताशनात्
anāptairdattamādatte naraḥ śastramalohajamśvāviccharaṇamāsādya pramucyeta hutāśanāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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