महाभारत 1.134.12
तत्र ते पुरुषव्याघ्रा विविशुः सपरिच्छदाःपुरोचनस्य वचनात्कैलासमिव गुह्यकाः
tatra te puruṣavyāghrā viviśuḥ saparicchadāḥpurocanasya vacanātkailāsamiva guhyakāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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