महाभारत 1.134.8
अर्चिताश्च नरैः पौरैः पाण्डवा भरतर्षभाःजग्मुरावसथं पश्चात्पुरोचनपुरस्कृताः
arcitāśca naraiḥ pauraiḥ pāṇḍavā bharatarṣabhāḥjagmurāvasathaṃ paścātpurocanapuraskṛtāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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