महाभारत 1.135.13
समृद्धमायुधागारमिदं तस्य दुरात्मनःवप्रान्ते निष्प्रतीकारमाश्लिष्येदं कृतं महत्
samṛddhamāyudhāgāramidaṃ tasya durātmanaḥvaprānte niṣpratīkāramāśliṣyedaṃ kṛtaṃ mahat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें