महाभारत 1.136.14
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
एवं ते विलपन्ति स्म वारणावतका जनाःपरिवार्य गृहं तच्च तस्थू रात्रौ समन्ततः
evaṃ te vilapanti sma vāraṇāvatakā janāḥparivārya gṛhaṃ tacca tasthū rātrau samantataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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