महाभारत 1.136.3
अस्मानयं सुविश्वस्तान्वेत्ति पापः पुरोचनःवञ्चितोऽयं नृशंसात्मा कालं मन्ये पलायने
asmānayaṃ suviśvastānvetti pāpaḥ purocanaḥvañcito'yaṃ nṛśaṃsātmā kālaṃ manye palāyane
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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