महाभारत 1.136.4
आयुधागारमादीप्य दग्ध्वा चैव पुरोचनम्षट्प्राणिनो निधायेह द्रवामोऽनभिलक्षिताः
āyudhāgāramādīpya dagdhvā caiva purocanamṣaṭprāṇino nidhāyeha dravāmo'nabhilakṣitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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