महाभारत 1.138.6
आगमंस्ते वनोद्देशमल्पमूलफलोदकम्क्रूरपक्षिमृगं घोरं सायाह्ने भरतर्षभाः
āgamaṃste vanoddeśamalpamūlaphalodakamkrūrapakṣimṛgaṃ ghoraṃ sāyāhne bharatarṣabhāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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